कबीर के दोहे चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह । जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥ माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥ माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर । कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥ तिनका [...]
Archive for the ‘Indian Mystics’ Category
Kabir ke Dohe
Posted in Indian Mystics on October 26, 2011 |
Kabir ke dohe
Posted in Indian Mystics on October 26, 2011 |
Kabir (1440AD to 1518AD) was one of the early saints of bhakti kaal who lived in northern India. By profession he was a weaver. He was a disciple of Guru Ramanand from southern India. He shunned religious affiliations and sang the glory of one God in vedanta as well as bhakti tradition. Kabir wrote in [...]
संत दादू के पद – Sant Dadu Ke Pad
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
पूजे पाहन पानी दादू दुनिया दीवानी, पूजे पाहन पानी।गढ़ मूरत मंदिर में थापी, निव निव करत सलामी।चन्दन फूल अछत सिव ऊपर बकरा भेट भवानी।छप्पन भोग लगे ठाकुर को पावत चेतन न प्रानी।धाय-धाय तीरथ को ध्यावे, साध संग नहिं मानी।ताते पड़े करम बस फन्दे भरमें चारों खानी।बिन सत्संग सार नहिं पावै फिर-फिर भरम भुलानी। रूप रंग [...]
मीरा के पद – Meera Ke Pad
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
दरद न जाण्यां कोय हेरी म्हां दरदे दिवाणी म्हारां दरद न जाण्यां कोय।घायल री गत घाइल जाण्यां, हिवडो अगण संजोय।जौहर की गत जौहरी जाणै, क्या जाण्यां जिण खोय।दरद की मार्यां दर दर डोल्यां बैद मिल्या नहिं कोय।मीरा री प्रभु पीर मिटांगां जब बैद सांवरो होय॥ # अब तो हरि नाम लौ लागीसब जग को यह [...]
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
मुख दधि लेप किएसोभित कर नवनीत लिए।घुटुरुनि चलत रेनु तन मंडित मुख दधि लेप किए॥चारु कपोल लोल लोचन गोरोचन तिलक दिए।लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए॥कठुला कंठ वज्र केहरि नख राजत रुचिर हिए।धन्य सूर एकौ पल इहिं सुख का सत कल्प जिए॥ # प्रभू! जी मोरे औगुन चित न धरौ । सम [...]
गुरु नानकदेव के पद – Guru Nanakdev Ke Pad
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
झूठी देखी प्रीत जगत में झूठी देखी प्रीत।अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥ #को काहू को भाईहरि बिनु तेरो को न सहाई।काकी [...]
रहीम के दोहे – Raheem Ke Dohe
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय। रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अगाय॥ देनहार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन। लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन॥ अब रहीम मुसकिल परी, गाढ़े दोऊ काम। सांचे से तो जग नहीं, झूठे मिलैं न राम॥ गरज आपनी आप सों रहिमन कहीं न जाया। जैसे [...]
कबीर के दोहे | Kabir Ke Dohe | Hindi Dohe
Posted in Indian Mystics on October 6, 2011 |
चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह । जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥ माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥ माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर । कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥ तिनका कबहुँ ना निंदये, जो पाँव [...]




