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Nismar

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गुनाह

August 23, 2007 by nismar

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अगर मैं मर ही गया तो
गुनाह किसको लगेगा
अपने आप को
बिल्कुल नही मैं तो वहीँ करूंगा
जो वक़्त कहेगा
और वक़्त के साथ चलने वाले
गुनाहगार कैसे हो सकते हैं।

मेरी जिन्दगी मे दो ही लडकी आयी है
एक तो वो जो दोस्त हैं
और दुसरी वो जो प्रेमिका हैं।

अब ना तो दोस्त को दोस्त कहने का मन है
ना प्रेमिका को प्रेमिका
दोनो ने ही मुझसे खेला हैं
बाज़ार का खिलोना हूँ
शायद उनको भी पता है

एक ने खिलोने से खेला हैं
तो दुसरे ने खिलौने को
अपना बना के
कुछ दिनों तक झेला हैं

मैं खुदा ना खास्ते अगर दुनिया से कुछ करता हूँ
जो कि मैं करने नही जा रहा
तो दोनो के सर इलज़ाम लगता हूँ
प्रेमिका को ७० प्रतिशत
और मित्र को बाकी ३० प्रतिशत
का हिसाब लगाता हूँ
और अगर थोड़ी बहुत शरम है किसी मे
तो उधेर नरक मे ही
एक और बिस्तर का इंतजाम कराता हूँ

मगर मुझको पता है
मैं इधेर भी अकेले हूँ
और उधेर नरक मे और भी अकेले रहूँगा
यहीं सोच के
इधेर धरती पे ही मजमा लगाऊँगा
जो भी हो जैसे भी हो
जिन्दगी जिस रुप मे आएगी
वैसे ही अपनाऊँगा ।

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