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मंजिलें ही खो जाये तो हम जिंदा कैसे रहें
जितना ही हार हो जाये तो हम जिंदा कैसे रहें
जब दर्द ही दवा हो जाये तो हम जिंदा कैसे रहें
रास्ता को मंज़िल बना के हम जिंदा कयों ना रहें
हार जीत का भेद भूला के हम जिंदा कयों ना रहें
दर्द के नशे मे चूर हो के हम जिंदा कयों ना रहें ।




