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Nismar

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दांत गया

August 14, 2007 by nismar

दिन मे पांच दस मिनट सो लेना सही रहताहैं। अभी खाया अभी सोया। खाने के बाद मुझे आराम चाहिऐ । भाड़ भाड़ मे जाये दुनिया , भाड़ मे जाये काम धाम , भाड़ मे जाये दोस्त यार मुझे सोना है तो सोना है। काम धाम का कोई खास मतलब नही है। सबको तो एक दिन मरना ही है तो फिर गदहे कि तरह काम करने का कया औचित्य है। दिन मे खा के सोने मे जो मज़ा है वो तो औरत मे भी नही। ये अलग बात है कि दुसरा बाला मज़ा हम अभी चखे नही हैं। चखे नही है तो क्या हुआ लोगों से सुना है, किताबों मे पढा है और चलचित्रों मे देखा तो है ही । वो जमाना गया जब चुप छुप के ये सब किया करते थे। अब तो खूलेयाम करेगें और डंके कि चोट पेर सबको कहेंगें। सच है, तो है, चोरी चोरी करने से मन मे द्वेष ही पैदा होता है।
हाँ तो मैं खा के लेटा । जल्दी नींद लगने कि आदत है सो निंदया रानी जल्दी ही आ गयी। पक्का वाला नही कच्चा वाला निंदिया आयी। और मैं नींद मे पकाने लगा। बस एक तरफ नींद चल रही थी उधर मैं कुछ पका रहा था। उपर से शुरू हुआ । देखता कया हूँ कि मेरा तो बाल ही पक गया है। मेरा दिमाग ठनका ऐसे कैसे हो सकता है। इस उमर मे बल कैसे पक सकता है। नही ऐसा नही हो सकता हैं। कुछ तो गड़बड़ हैं। किसी से पूछ के देखे कया । पीछे वाला बाल नही दिखता है। एक दो पका होगा जयादा से जयादा । अरे एक दो तो आम बात है। एक दो बाल तो साबका पक जाता है इस उमर मे आते आते। और ऐसे भी खाना दाना थिक से नही हो रहा है। पेट खराब रहने के कारन ही ये सब प्रोबेल्म है । एक बार खाना दाना सुधर जाये। पानी सानी अच्छा से पीना स्टार्ट हो जाये फिर तो सर के बाल अपने आप ही कला हो जायेंगें। यहीं सब सोच के नींद को फुसलाया। एक बार फिर से निन्द्रा देवी के गोद मे।
गोद मे रखे रखे निन्द्रा देवी का पैर दुःख रहा है शायद। निन्द्रा देवी ने ज़ोर से पैर हिलाया। हे निन्द्रा देवी इतना ज़ोर से कयों हिलाती हो । ओह ओह मेरे तो दांत ही टूट गए। उपर वाला हाँ जबरा के पास वाला गया। गया काम से । ओह। उपर ला ई न से अन्तिम के चारो दंन्त ग़ायब । दो तो पहले हो टूट चूका है और एक कुछ दिन पहले टूटा था और एक अभी गया काम से। निचे वाले हिस्से मे अभी बचता है। अब मैं खाना कैसे खाऊंगा । बाप रे बाप अभी तो २५ ही साल हुए हैं बाकी का जिन्दगी कैसे बीतेगा। अकेले रहने का भी सोचा हूँ। कौन मेरी मदद करेगा बुढ़ापा मे। नही नही किसी से द्वेष भाव रखने से अच्छा है सब कुछ भुला के फिर से दंत जुड़वाँ लेना।। जो भी हो शादी बगैरह कर के किसी तरह जिन्दगी शुरू करें।
इधेर जिन्दगी टूटा उधेर दांत टूटा। सबको एक ही साथ टूटना था। यहीं सब सोचते हुए सपना भी टूटा। सुकिरिया भगवन सुकिरिया मेरा दंत सही शालामत है। उसी जगह पर जहाँ पहले था।। अभी तो मैं नकली दंत खरीदने कि सोचा था। मगर अपने असली दांत को जिंदा देख के अत्यंत हर्षा हो रहा है। जय हो दंत देव । सब आपकी ही किरपा हैं। इससे पहले भी आप कई बार दिन के सपने मे आ चुके हैं। हे दंत देव आपका लोगों को डराने का ये वाला स्टाइल अच्छा है। मैं तो बच गया कोई दुसरा होता तो सपने मे नरक का ट्रेन पकड़ लेटा । चलिए जब अब दंत सही सलामत है तो फिर कुछ खाना दाना हो जाये.

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