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Nismar

Life: A lesson

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डंका

August 13, 2007 by nismar

भाई साहब बडे दिनों से आपसे इक बात कहने का मन था मगर धयान नही रहा इसीलिये कह नही पाए। एक दो बार और इस बारे मे ख़याल आया हैं मगर कभी इस बारे मे लिखने को नही सोचा सो मुद्दा वहीँ का वहीँ पड़ा रह गया। अभी जब मैं एक लेख पढ़ रहा था तो एक्बैग से जोश आ गया और लगा कि बात लिख ही देना चाहिऐ । बात बहुत ही महत्वपूर्ण है। मैंने अनुभव किया हैं इसी लिए बता रहा हूँ। एक दम फ्री मे। अगर इस बात को आप अपना लेंगें तो फिर आपके जीवन मे बहुत बड़ा परिवर्तन आ जाएगा। तो अब काम कि बात सुनिये एक वाकया मे ” जिन्दगी मे किसी से मत दरिये” मैं आदमी कि बात नही कर रहा हूँ। माता पिता भाई बहन पति पत्नी तो बहुत साधारण बात हैं। हाँ तो मैं बात कर रहा हूँ अपने आप से डरने कि । सबसे पहली बात अभी और इसी वक्त अपनी जिन्दगी से मोह माया छोड़ दीजिए। दर दर के जीना , मोह माया मे जीना, रूटीन के अन्दर कसमसा के जीना कोई जिन्दगी नही हैं। सबको लगता है कि यहीं जिन्दगी हैं। सबको लगेगा ही, कयों किसी मे हिम्मत नही है मोह माया त्यागने कि। एक बार मोह माया छोड़ के देखिए, जो मन करे वो कीजिये, जो सही हो वहीँ बोलिए, ज़ीने , मरने कि चिन्ता छोड़ दीजिए, फिर देखिए ज़ीने का मज़ा। आप को गजब का अनुभव होगा। आपको लगेगा आज जा के आप का असली जनम हुआ है। माँ के पेट से जन्म लेना तो स्वाभाविक हैं ।

सभी लोग जनम लेते हैं इस मे अपने कया बहादुरी कर दी। अगर बहादुरी करना है तो अपने आप से जनम लीजिये। आप अपने भाग्य का निर्माता खुद बनिए । भगवन कौन होता है आपका भविष्य निर्धारित करने वाला। आप भगवन कि दी हुई भीख पे जीना पसंद करेंगें। नही ना । तो फिर ये सब दुनिया के जाल जंजाल मे फसते कयों हैं। अपना धोती बांधिए और निकल जाईये मैदान मे । जो होगा सो देखा जाएगा। किसी से मत डरिये। पुलिस चोर ऋषि महात्मा सब से अकड़ जयीए । अगर आप सही है तब फिर आंख निचे करके कयों चलते हैं। मैं जानता हूँ आप इसी लिए आंख निचे कर के चलते हैं कयों कि आपका परिवार है, आप के मुम्मी पापा हैं, अपको पैसा का लालच है, नौकरी मे उन्नति कि आशा है। लालच कहिये या फिर मोह माया मगर कारन यहीं हैं। साहब जी ये सब फालतू है बिस्वास मानिये । आपको अपनी पत्नी पे बहुत नाज़ है ना । आपको आपको लगता होगा कि अपकी पत्नी जी आपको बहुत प्यार करती हैं। आप बहुत बडे संसय मे हैं अगर ऐसा सोचते हैं तो। एक दिन आप अपनी पत्नीजी को बोल के देखिए कि आप किसी और औरत के साथ सेक्स कर के घर लौतिये किसी शाम को फिर देखिए पत्नी जी का प्यार कहॉ जाता हैं।

 प्यार व्यार कुछ नही साहब सब ढोंग हैं। प्यार स्वार्थ का ही दुसरा नाम है। दुनिया मे सब कुछ स्वार्थ है। अगर सब कुछ स्वार्थ ही है तो आप कयों नही अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। सच बात तो ये है कि आपको पता ही नही कि आपका स्वार्थ है कया । और जब तक पता ही नही होगा तब तक आप उसको सिद्ध कैसे करेंगें। जैसे ही आपको अपना स्वार्थ पता चलेगा आप दुनिया मे किसी से नही दरेंगें । सभी रिश्ते नाते , मोह माया , धन दौलत आपके लिए कोई मायने नही रखेगा। आप बस अपने लिए ज़ियेंगें । करेंगें वहीँ जो आप का मन करेगा। हर आनेवाला दिन आपके लिए एक नयी जिन्दगी ले के आएगा । घुट घुट के जीना भी कोई जिन्दगी है भला। दुर्भाग्य इसी बात का है कि आपको घुट घुट के ज़ीने कि ऐसी आदत हो गयी कि आप असली जिन्दगी को ही भूल गए हैं। आपको पता ही नही कि असली जिन्दगी है कया। अभी कुछ नही बिगडा है अभी भी मरने मे एक दो साल तो बच ही रहे हैं चड्डी पहनिये और उतर जाईये मैदान मे। दिखा दीजिए दुनिया को अपना खेल। मुझे पता है कि आपका खेल एक दम मस्त होगा । आपमें दम है, आप मे शक्ति है, आपमें उर्जा है। बस एक बार चड्डी पहनने कि देरी फिर देखिए दुनिया कैसे आपके पीछे पीछे भागती है। डमरू आप के हाथ मे होगा और बन्दर लोग आप के पीछे पीछे । और तो और अगर कोई बन्दर आय बाय करें तो झट से डाट दीजिए। इस बात से मत दरिये कि कहीँ बन्दर भाग ना जाये । ये सब मत सोचिये कि अगर बन्दर भाग गया तो आपका पेट कैसे भरेगा। भाग गया तो भाग गया। जिसको तमाशा करना है करे वो आपके साथ और जिसको नही करना अपना रास्ता नापे। आपको किसी का ना तो दर है और ना ही दो बक्त कि रोटी कि चिन्ता ।

जयादा से जयादा कया होगा सब कुछ छूट जायगा , भोजन सोजन का प्रबंध नही हो पायेगा। पहाड़ पर्वत कि गुफा मे घर बना लीजियेगा और घास फूस खा के काम चला लीजियेगा। जब महाराणा प्रताप जैसे शूर वीर घास पाट खाए हैं तो हम कयों नही खा सकते । मिला जुला के बस एक छोटा सा बात कहना हां “किसी से दरिये मत जो कहना है डंके कि चोट पे कहिये, ये मत सोचिये कि कहने के बाद आप जिंदा रहेंगें या फिर नरक मे आप से मेरी मुलाक़ात होगी।

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